राजनीति

टूटने जा रही है अंग्रेजों की 152 साल पुरानी परंपरा, मोदी सरकार ने कर ली है बड़ी तैयारी…

इस बात में तो कोई दो राय नही है कि जबसे मोदी सरकार सत्‍ता में आयी है तभी से देश में काफी बदलाव दिखें है। आपको बता दें कि पिछली सरकारें जो 70 वर्षो में नही कर पायी वो मोदी सरकार महज साढ़े चार वर्षो में कर दिखाया। वहीं मोदी सरकार जनताहित में 152 वर्ष पुरानी अंग्रेजों की परंपरा तोड़ने जा रही है, क्‍योंकि मोदी सरकार कर रही यह बड़ी तैयारी।


आपको बता दें कि जल्‍द ही सरकार देश के वित्‍तीय सत्र को बदलने जा रही है, अगर सबकुछ मौजूदा सरकार के अनुसार रहा है तो अगले वर्ष यानी 2020 में वित्‍तीय वर्ष की शुरूवात 1 अप्रैल की जगह 1 जनवरी से शुरू होगा। अब आम बजट दिसम्‍बर में ही संसद में पेश कर दिया जायेगा। जानकारी के लिये बता दें कि अगर मोदी सरकार इसे लागू कर देती है तो ये 152 वर्ष पुरानी परंपरा का आखिरी वर्ष होगा। केन्‍द्र सरकार इसकी पूरी तैयारी में लगी हुई है। बता दें कि अंग्रेजों ने वर्ष 1967 में मार्च में बजट पेश किया था उसी के आधार पर कंपनियां भी मिमाई रिजल्‍ट घोषित करती है। पर अब मोदी सरकार इस परंपरा को जल्‍द ही बदलने वाली है।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि फाइनेशिंयल ईयर की तारीख में अगर परिवर्तन होता है तो इससे आम जनजीवन पर किसी प्रकार का कोई असर नही पड़ेगा। सिर्फ टैक्‍स प्‍लाइनिंग,टैक्‍स फाइलिंग, कंपनियों के तिमाही नतीजों और शेयर बाजार पर इसका असर दिख सकता है। जानकारों की माने तो बजट प्रक्रिया को पूरा करने में करीब दो महीने का समय लगता है,ऐसे में बजट सत्र की संभावित तारीख नवम्‍बर का पहला सप्‍ताह हो सकती है। भारत में फाइनेंशियल ईयर 1 अप्रैल से 31 मार्च का होता है। इस संबंध में आयोग का कहना है कि मौजूदा प्रणाली में कामकाज के सत्र का प्रयोग नही हो पाता है। संसद की स्थायी समिति ने भी इसे स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी।इस संबंध में आप लोगों की क्‍या प्रतिक्रियायें है?कमेंट बॉक्‍स में अपनी महत्‍वपूर्ण राय अवश्‍य लिखें।

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